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<title> تحقیقات کاربردی علوم جغرافیایی </title>
<link>http://jgs.khu.ac.ir</link>
<description>تحقیقات کاربردی علوم جغرافیایی - مقالات نشریه - سال 1404 جلد25 شماره78</description>
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<language>fa</language>
<pubDate>1404/6/10</pubDate>

					<item>
						<title>کمی‌سازی ظرفیت تعدیل گرما تحت تأثیر چشم‌انداز‌های سبز- آبی در کلان‌شهر تهران</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4315&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;پژوهش حاضر با هدف سنجش و ارزیابی ظرفیت تعدیل گرما (&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;HMI&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;) در محدوده کلان شهر تهران و با استفاده از رویکرد نوین مدل خنک کنندگی شهری (&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;UCM&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;) در یک بستر فضایی انجام شده است. &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;UCM&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; نقشه هایی از شاخص تعدیل گرما تولید می کند که ظرفیت سرمایش فضاهای سبز شهری را در تمام طبقه های کاربری اراضی در یک مکان و با در نظر گرفتن پارامترهای متعدد مانند تبخیر و تعرق، سایه ایجادشده توسط درختان، سپیدایی، دمای هوای حومه شهر، شدت اثر جزیره گرمای شهری، فاصله اختلاط هوا و حداکثر فاصله خنک کنندگی تخمین می زند. ارزیابی نقش متغیرهای محیطی مؤثر بر &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;UCM&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; در منظر موردمطالعه بیانگر این بود که در مناطق 1 ، 22 و بخش  های شمالی منطقه 4 شهرداری تهران با کاربری درختان تنک، درختچه و بوته زار، چیدمان های باز و کم ارتفاع و سطوح آبی، شدت اثر جزیره گرمایی به کمترین مقدار خود رسیده و اختلاف دمای بین شهر و حومه در بازه 0 تا 3/1 درجه سلسیوس متغیر است؛ اما بیشینه شدت جزیره گرمای شهری در بخش های مرکزی منطقه مطالعاتی (مناطق 21، 13 و 14) با بافت فشرده و متراکم و گسترش سطوح نفوذناپذیر مشاهده می گردد که حداقل مقادیر شاخص تبخیر و تعرق (12/0-45/0) و سپیدایی (09/0- 16/0) نیز در این نواحی متمرکز گردیده است. مبتنی بر این پارامترها توزیع مکانی شاخص &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;HMI&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; در چشم انداز موردبررسی نشان داد که ظرفیت خنک کنندگی در منطقه موردمطالعه از 08/0 در نواحی مرکزی شهر تا 9/0 در مناطق تحت تأثیر فضاهای سبز مختلف و همچنین بدنه های آبی متفاوت است. در واقع بیشینه شاخص ظرفیت خنک کنندگی در کاربری با پوشش درختان انبوه و پراکنده در منطقه متمرکز گردیده که این نواحی توانسته اند با ظرفیت 63 درصدی خنک کنندگی، به طور متوسط 48/2 درجه سلسیوس از اثر جزیره گرمایی را خنثی نمایند. روش به کاررفته در این پژوهش می تواند به عنوان مرجعی برای طراحان شهری در ادغام رویکردهای خنک سازی شهری و راهبردهای کاهش جزیره گرمایی، در برنامه ریزی و طراحی مناطق شهری به کار گرفته شود.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12pt&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot; style=&quot;font-size:11.0pt&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:&quot;B Nazanin&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>علی اکبر شمسی پور</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>بهبود دقت زمانی و مکانی نقشه شاخص پوشش گیاهی (NDVI) با استفاده از الگوریتم‌های تلفیق تصاویر ماهواره ای</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4305&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;استفاده از تصاویر ماهواره&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ای لندست در محدوده&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های وسیع، امکان پوشش هم زمان کل منطقه را فراهم نمی&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;کند. این مسئله زمانی که ارزیابی پوشش&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های گیاهی هم زمان و یا بررسی تغییرات پدیده&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های کوتاه مدت در یک منطقه وسیع مد نظر باشد، مطالعات را با چالش مواجه می&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;سازد. ادغام داده&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های تصاویر ماهواره&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ای لندست با قدرت تفکیک&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;پذیری مکانی مناسب، با اطلاعات تصاویر ماهواره&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ای مادیس با قدرت تفکیک&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;پذیری زمانی مناسب، می&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;تواند راه حلی برای پیوند بین داده&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های با وضوح زمانی و مکانی مناسب باشد. هدف از این تحقیق ارزیابی الگوریتم&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های مختلف ادغام تصاویر در تهیه نقشه شاخص پوشش گیاهی (&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NDVI&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;) می&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;باشد. بدین منظور از شش الگوریتم تلفیق، شامل &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NNDiffuse&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; (انتشار نزدیک ترین همسایه)، &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;PC&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; (مؤلفه های اصلی)،&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;Brovey&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;،&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;CN&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;(رنگ نرمال شده)، &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;Gram-Schmidt&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; و &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;SFIM&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; (مدل مبتنی بر فیلتر هموارسازی) در یک محدوده آزمایشی در استان خوزستان استفاده شد. پس از ارزیابی نتایج الگوریتم&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ها و انتخاب مناسب&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ترین الگوریتم تلفیق، بر اساس محاسبه میزان خطاهای آماری و ارزیابی معیارهای طیفی (ضریب همبستگی) و مکانی (فیلتر لاپلاسین)، اطلاعات طیفی و مکانی بازتاب باندهای قرمز و مادون قرمز نزدیک هشت تصویر موزائیک شده لندست-8 (30 متر) با باندهای قرمز و مادون قرمز نزدیک یک تصویر مادیس (250 متر) تلفیق گردید. جهت بررسی پوشش&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های گیاهی، با تصویر ماهواره&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ای تلفیق شده، شاخص پوشش گیاهی (&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NDVI&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;)، در محدوده استان خوزستان تهیه گردید. نتایج به دست آمده نشان داد که الگوریتم &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NNDiffuse&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; از دقت مطلوب&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;تری جهت ادغام باندهای قرمز و مادون قرمز نزدیک لندست 8 و مادیس برخوردار است، به طوری که شاخص گیاهی &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NDVI&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; به دست آمده از این الگوریتم در مقایسه با تصویر لندست- 8 اصلی، از کم&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ترین خطای آماری (1234/0) &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;RMSE&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; و (081/0)&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span bold=&quot;&quot; new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;MAE&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; برخوردار است.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br&gt;
&amp;nbsp;&lt;/div&gt;</description>
						<author>مصطفی کابلی زاده</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>برنامه‌ریزی رقابت‌پذیری شهری از طریق گردشگری به‌منظور برندسازی شهری (مطالعه موردی شهر کرمانشاه)</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4052&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;امروزه باتوجه به شرایط جهانی شدن، برندسازی شهرها باتوجه به توان های گردشگری از اهمیت بسزایی برخوردار است و اکثر مناطق با برنامه ریزی در این زمینه سعی در توسعه اقتصادی و محرومیت زدایی بیشتر با استفاده از گردشگری دارند. در این پژوهش باتوجه به پتانسیل های بالای شهر کرمانشاه در زمینه گردشگری درصدد برنامه ریزی راهبردی برندسازی شهری با      استفاده از گردشگری بودیم. روش پژوهش در این مطالعه توصیفی- تحلیلی و هدف آن کاربردی بود. داده ها و اطلاعات موردنیاز از منابع کتابخانه ای و پیمایشی (پرسشنامه و مصاحبه) از متخصصین جمع آوری شد. تکنیک متاسوات استفاده شد که براساس رهیافت داخل به خارج و دیدگاه مبتنی بر منابع است رقابت پذیری شهرها و مناطق را فراهم می کند. شهر کرمانشاه دارای قابلیت های بالایی برای جذب گردشگری به منظور رقابت پذیری شهری، منطقه ای و جهانی است. یافته های این پژوهش نشان می دهد در بین قابلیت و توانایی های شهر کرمانشاه وجود بناهای تاریخی و فرهنگی مانند طاق بستان، تکیه ها، خانه های تاریخی، موزه ها، نقش مرکزیت صنایع دستی، تشابهات فرهنگی با افراد ساکن عراق و ترکیه، فرهنگ، اعتقادات و آداب ورسوم به عنوان پتانسیل های گردشگری کرمانشاه دارای چهار ویژگی (VIRO) هستند درواقع این ویژگی بیشترین میزان تناسب راهبردی با متغیرهای کلان مؤثر بر جذب گردشگر&amp;zwj;  و  رقابت پذیری شهری از طریق گردشگری در شهر کرمانشاه دارا بود. در بین متغیرهای کلان تأثیرگذار پاندمی کرونا، وجود تحریم ها علیه ایران، تغییرات آب وهوایی و بلایای طبیعی و کمبود اعتبارات دارای بیشترین میزان تأثیر  بر  رقابت پذیری شهری کرمانشاه هستند باتوجه به منابع و متغیرهای کلان تأثیرگذار نقشه تناسب راهبردی ترسیم شد و راهکارهای مناسب ارائه گردید.&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>کرامت اله زیاری</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>فرونشست دشت‌های ممنوعه بحرانی (منطقه موردمطالعه: دشت اشتهارد)</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4381&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;span style=&quot;font-size:11pt&quot;&gt;&lt;span style=&quot;line-height:107%&quot;&gt;&lt;span calibri=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot; dir=&quot;RTL&quot; style=&quot;font-family:&quot;B Zar&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12pt&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot; style=&quot;font-size:10.5pt&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt;در دو دهه اخیر فرونشست به عنوان یک مخاطره ژئومورفیک و یکی از بحران های زیست محیطی، هر ساله خسارات جبران ناپذیری را به دشت های ایران تحمیل می کند که می توان گفت یکی از مهم ترین علل آن در حال حاضر برداشت غیراصولی و بی رویه از سفره های زمینی می باشد. دشت اشتهارد به عنوان یکی از قطب&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt;های صنعتی و کشاورزی استان البرز حائز اهمیت است و به دلیل افت شدید سطح آب زیرزمینی توسط وزارت نیرو ممنوعه بحرانی اعلام شده است. ازاین رو بررسی میزان نرخ فرونشست و پرداختن به علل و عوامل تأثیرگذار در جهت مدیریت خطر آن، دارای اهمیت زیادی است. در این پژوهش جهت بررسی فرونشست دشت اشتهارد از تکنیک تداخل سنجی تفاضلی راداری (&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;font-size:10.5pt&quot;&gt;D_ InSAR&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot; style=&quot;font-size:10.5pt&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt;) و از داده های ماهواره &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;font-size:10.5pt&quot;&gt;Sentinel-1A&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot; style=&quot;font-size:10.5pt&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt; در بازه زمانی (۲۰۲۳ تا ۲۰۱۷) استفاده شد. در این بازه زمانی فرونشست منطقه بین ۲.۰۸- تا ۲.۹۳- سانتی متر متغیر است که بیشترین مقدار فرونشست مربوط به بازه زمانی ۲۰۲۰ -۲۰۱۹ حدود ۲.۹۳ - سانتیمتر و کمترین مقدار فرونشست در بازه زمانی ۲۰۲۳ -۲۰۲۲ حدود ۲.۰۸- سانتیمتر است. نرخ فرونشست از شرق به غرب و در پهنه جنوبی با افزایش همراه است. درواقع بیشینه فرونشست در تمام بازه های مطالعاتی در محدوده آبخوان اشتهارد متمرکز است که بخش عمده ای از مزارع، آبادی ها، کارخانه ها و شهر اشتهارد، شهرک های صنعتی (کوثر، امید و اشتهارد)، زمین های کشاورزی و بیشترین تمرکز و استقرار منابع زیرزمینی (چاه ها) را در خودش جای داده است. نتایج هیدروگراف ها و درون یابی با استفاده از آمارهای چاه های پیزومتری نیز افت آب های زیرزمینی و افزایش عمق را در این محدوده نشان می دهد؛ این در حالی است که نتایج بررسی همبستگی میزان فرونشست زمین با تغییرات عمق آب زیرزمینی هم در سطح %95 معنی دار بوده است به طوری که با افزایش عمق آب زیرزمینی فرونشست در منطقه افزایش می&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot;&gt;یابد. براساس پروفیل های تغییرات فرونشست، فرونشست منطقه موردمطالعه الگوی پیچیده ای دارد که این تغییرات و نوسانات زمانی - مکانی نشان دهنده تأثیرات مختلفی ازجمله فعالیت های انسانی (مانند شدت، نوع فعالیت یا استخراج بی رویه آب از منابع زیرزمینی)، زیست محیطی، مشخصات زمین شناسی (جنس رسوبات، ضخامت سفره، موقعیت سنگ کف و...) میزان تغذیه و تخلیه آبخوان و... می باشد.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12pt&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot; style=&quot;font-family:&quot;B Nazanin&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>رعنا نوروزی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>مطالعه الگوهای همدیدی-دینامیکی و روند تغییرات پوشش برف فراگیر در شمال شرق ایران</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4279&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; در  این  پژوهش  مهم ترین  الگوهای  همدیدی  موجد  بارش  برف  فراگیر در شمال شرق ایران  موردبررسی  قرار گرفته  است.  برای  این  منظور  داده&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های کد هوای حاضر و عمق برف ایستگاه &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های سینوپتیک شمال شرق کشور  طی  دوره  آماری  1371-1400، برای ماه&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های مهر تا اسفند، از  سازمان  هواشناسی کشور دریافت شد. جهت  بررسی  بارش&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های  برف  فراگیر، روزهایی که بیش از 70 درصد منطقه موردمطالعه هم زمان شاهد ریزش برف بود، به عنوان یک روز فراگیر استخراج شدند.  به منظور  انجام  تحلیل&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های  همدیدی-دینامیکی در  مورد  بارش&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های  برف  فراگیر در شمال شرقی  ایران،  از  روش  طبقه&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;بندی  با  استفاده  از  تحلیل  خوشه&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ای استفاده شد و نقشه&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های  روزهای  نماینده  از  جمله دمای  جو،  شار  رطوبت،   ارتفاع  ژئوپتانسیل،  تاوایی، جبهه&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;زایی،  جت استریم،   شاخص  امگا و  داده&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های  باد  مداری  و  نصف النهاری  ترسیم  شد. تحلیل روند نیز با استفاده آزمون من کندال انجام شد. نتایج نشان داد که  3 الگوی پرفشار سیبری و مرکز اروپا_کم&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;فشار شرق ایران، پرفشار غرب ایران_کم فشار سودان، پرفشار مرکز اروپا_کم فشار شرق ایران و افغانستان  به  بهترین  نحو  بارش&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های  برف  فراگیر  در  منطقه  موردمطالعه  را  توجیه  می&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;نمایند. در تمامی الگوها در  تراز  میانی  جو  شدت یافتن جریان&lt;/span&gt;&lt;span cambria=&quot;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;های نصف النهاری  بادهای غربی  همراه با تشکیل  مراکز پرفشار  و  کم فشار موجب ایجاد  بلاکینگ  در مسیر جریانات  غربی  شده  و  شرایط را برای  صعود  هوا  فراهم کرده  است .  تمرکز  میدان  امگای منفی و فرارفت  تاوایی  نسبی  مثبت  به  همراه  قرار گرفتن  منطقه شمال شرق ایران  در  نیمه  چپ  خروجی  رودباد  جنب حاره،  موجب  ناپایداری های  شدید  و  بارش  برف فراگیر در منطقه شده است. همچنین نتایج نشان داد که علیرغـم عـدم وجـود رونـد در تعداد روزهای فراگیر برف در شمال شرق ایران، تعداد روزهای برف فراگیر در طول زمان روندی کاهشی داشته است.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;</description>
						<author>بهلول علیجانی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>پیشران‌های اثرگذار بر خودسازمان‌دهی روستاییان و بهبود معیشت پایدار روستایی شهرستان آشتیان</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4358&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;خودسازمان دهی روستاییان به عنوان یک فرایند مشارکتی، نقشی بنیادین در ارتقای معیشت پایدار در مناطق روستایی ایفا می کند. این مطالعه باهدف شناسایی پیشرانهای اثرگذار بر خودسازمان دهی روستاییان و بهبود معیشت پایدار روستایی در شهرستان آشتیان انجام شد. این پژوهش کیفی با رویکرد تحلیلی ـ اکتشافی و از طریق پرسش نامه نیمه ساختارمند و مصاحبه با 30 نفر از خبرگان در زمینه موضوع موردمطالعه انجام شد. داده های کیفی گرد آوری شده با استفاده از روش دلفی و نرم افزار میک مک برای شناسایی روابط و الگوهای میان مفاهیم تجزیه وتحلیل شد. یافته ها آشکار نمود شیوه پراکندگی عوامل و متغیرهای اثرگذار بر بهبود معیشت پایدار روستایی در ناحیه موردمطالعه به صورت ناپایدار بوده است. همچنین از میان 24 عامل اولیه تأثیرگذار، تعداد 10 عامل که دارای بالاترین امتیاز بودند به مثابه پیشران های بنیادین اثرگذار بر روند آتی خودسازمان دهی روستاییان در راستای معیشت پایدار روستایی شناسایی شد. پیشران های نوآوری خواهی و خلاقیت روستاییان در زمینه فعالیت های کشاورزی و غیرکشاورزی، مهارت و تجربه روستاییان در راستای فعالیت در گروه ها، انجمن ها و برپایی تشکل های محلی به مثابه عامل فردی؛ افزایش روحیه کارآفرینی، راه اندازی و ترویج کسب وکارهای نوین محلی به عنوان عامل روان شناختی؛ افزایش مشارکت، همکاری و احساس مسئولیت در انجام فعالیت های کشاورزی و غیرکشاورزی به عنوان عامل اجتماعی؛ توانمندسازی روستاییان و افزایش آگاهی و مهارت های اجتماعی و اقتصادی آن ها، بهره گیری از فناوری های نوین IT و ICT در فرایند توانمندسازی ساختاری روستاییان در راستای خودسازمان دهی به مثابه عامل آموزش و توانمندسازی؛ دسترسی به منابع مالی گوناگون و مطمئن برای بهره گیری در فعالیت های کشاورزی و غیرکشاورزی به مثابه عامل اقتصادی؛ واگذاری اختیار به روستاییان در راستای برنامه ریزی محلی و تمرکززدایی به عنوان عامل برنامه ریزی و مدیریت و سرانجام پیشرانهای حمایت از ایجاد و توسعه کسب وکارهای محلی و تنوع بخشی به فعالیت های کشاورزی و غیر کشاورزی روستاییان و همچنین افزایش سرمایه گذاری در فرایند کسب وکارهای نوآورانه در روستا به مثابه عامل حمایت اجتماعی- اقتصادی تعیین شد.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>ناصر شفیعی ثابت</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>واکاوی الگوهای غالب چرخندی بر روی بارش‌های دوره سرد در نیمه غرب میانی ایران</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=3935&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;چرخندهای برون حاره ای با توجه به فراوانی، مدت و شدت آن ها از عوامل اصلی بارش های عرض های میانه و بالا در سراسر مدیترانه در طی فصل زمستان و پاییز هستند. برای این پژوهش از داده های شبکه ای متغیرهای اقلیمی&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt; ECMWF &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;با تفکیک زمانی ۶ ساعته و تفکیک مکانی ۲۵/۰*۲۵/۰ از سال 1979-2016 و داده های بارش ایستگاه های ۴ حوضه آبریز از پایگاه داده های اسفزاری از سال ۱۹۷۹-۲۰۱۶ استفاده شد. ابتدا ارتفاع ژئوپتانسیل، دما، رطوبت و رودباد روزهای بارشی در محیط متلب استخراج شد. سپس با استفاده از الگوریتم استخراج مراکز چرخندی، این مراکز از روی ارتفاع ژئوپتانسیل با این شروط که ارتفاع ژئوپتانسیل کمینه و شیو ژئوپتانسیل بیشینه باشد استخراج شدند. در ادامه از روی ماتریس ارتفاع ژئوپتانسیل روزهای بارشی (498&amp;times;441&amp;times;361) با استفاده از روش تحلیل خوشه ای 4 الگوی جوی استخراج شدند. همچنین فراوانی رخ داد زمانی و مکانی ماهانه و میانگین دمایی مراکز چرخندی این الگوها در ماه های فصول سرد به دست آمد. نتایج نشان داد که الگوی اول ناوه مدیترانه ای است که بیشترین فراوانی را به میزان 42 درصد دارا می باشد. این الگو فرود آن به علت وجود زبانه های از پر ارتفاع که به حالت مانع عمل می کند باعث عمیق شدن کم ارتفاع مدیترانه شده است و محور آن تا روی دریای سرخ کشیده شده است و به دلیل برخورد زبانه های کم ارتفاع و پر ارتفاع درروی منطقه ناپایداری تشدید شده و بیشترین بارش ها را در میان الگوها باعث شده است. در مقابل الگوی چهارم که کمترین فراوانی را به میزان 10 درصد را دارا می باشد که الگوی ناوه ای بادهای غربی است که درروی دریای خزر عمیق شده اما به علت قرارگیری پر ارتفاع در جنوب منطقه مانع ورود کم ارتفاع شده و در بخش شمالی منطقه موردمطالعه مستقرشده است و به این دلیل کنتورها در شمال منطقه حالت مداری دارند درنتیجه چرخندهای کم تری وارد منطقه شده و منجر به کمترین میانگین بارش در بین الگوها شده است. همچنین نتایج نشان داد که درصد فراوانی چرخندهای هسته سرد در زمستان 60 درصد و در پاییز 40 درصد بوده است ولی درصد فراوانی چرخندهای هسته گرم در فصل زمستان 62 درصد و در فصل پاییز 38 درصد بوده که در زمستان درصد فراوانی چرخندهای هسته گرم نسبت به درصد چرخندهای هسته سرد افزایش پیداکرده است در مقابل در پاییز درصد فراوانی چرخندهای هسته گرم نسبت به هسته سرد کاهش پیداکرده است. در دهه اخیر هم از فراوانی رخداد تعداد چرخندها و هم از شدت چرخندها نسبت به دو دهه گذشته کاسته شده است. ازلحاظ مکانی غرب منطقه موردمطالعه ازلحاظ چرخندزایی همیشه فعال بوده است و با ورود به دوره سرد از پاییز به طرف زمستان مکان های چرخندزایی هم به تدریج فعال تر می شوند&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;
&lt;gdiv&gt;&lt;/gdiv&gt;&lt;gdiv&gt;&lt;/gdiv&gt;&lt;gdiv&gt;&lt;/gdiv&gt;</description>
						<author>محمد حسین ناصرزاده</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>تبیین عوامل واگرای ژئوکالچر بر روابط ایران و عراق</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4269&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;عراق مهم ترین بخش از سیاست خارجی ایران محسوب می گردد&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;برای سیاست گذاران ایرانی، عراق نسبت به سایر کشورهایی که ایران در آن ها از گروه های شبه نظامی محلی حمایت می کند، صحنه عملیاتی حیاتی تر و در نتیجه حساس تری است&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;تاریخ نشان داده است که حوادث عراق می تواند پیامدهای مهمی برای ثبات ایران داشته باشد&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;عراق همچنان تهدیدی برای امنیت ملی ایران است و به همین دلیل است که ایران به دنبال شکل دادن به سیاست داخلی و جهت گیری استراتژیک عراق است&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;از سال 2003، ایران با بهره گیری از مرزهای مشترک طولانی و روابط فرهنگی، مذهبی و اقتصادی عراق به طرز ماهرانه ای در میان جمعیت شیعه عراق نفوذ کرده است&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;نفوذ ایران چندوجهی است و شامل دسترسی به طیف وسیعی از بازیگران سیاسی و اجتماعی می باشد&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;. ازاین رو این تحقیق به دنبال بررسی عوامل واگرای ژئوکالچر در روابط ایران و عراق است. برای دستیابی به این هدف از روش توصیفی-تحلیلی و نرم افزار ویزارد بهره گرفته شد. یافته های تحقیق نشان داد &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;عوامل واگرا در روابط ژئوکالچر بین ایران و عراق در شرایط بحرانی و نیمه بحرانی قرار داد. تابلوی سناریوهای قوی از 8 وضعیت احتمالی مختلف تشکیل شده است. از این 8 وضعیت احتمالی، 3 وضعیت بحرانی، 1 وضعیت نیمه بحرانی، 1 وضعیت ایستا، 2 نیمه مطلوب، 1 حالت نیز وضعیت مطلوب دارند. ازآنجاکه اکثریت شهروندان ایرانی و عراقی مذهب مشترکی دارند و آن اسلام شیعه است.&lt;b&gt; &lt;/b&gt;حوزه ها یا حوزه های علمیه در شهرهای مذهبی قم در ایران و نجف در عراق، مراکز آموزش شیعیان هستند؛ بنابراین می توان از این عامل برای بهبود شرایط استفاده نمود.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;</description>
						<author>مجید رسولی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>آینده‌پژوهی توسعه منطقه شهری تهران در فرآیند جهانی‌شدن</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=3880&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;امروزه تغییرات ساختاری در اقتصاد، تحولات سریع علم و فناوری، محدودیت ها در منابع مالی و انسانی، وابستگی متقابل کشورها، رقابت در سطح جهانی و تمایل روزافزون به جهانی شدن، لزوم درک بهتر &amp;laquo;تغییرات&amp;raquo; و &amp;laquo;آینده&amp;raquo; را برای دولت ها، کسب وکارها، سازمان ها و مردم ایجاب می کند. بدین منظور، آینده پژوهی از طریق ایجاد ارتباط، هماهنگی و هم اندیشی بین سازمان ها و نهادها به سیاست گذاران و برنامه ریزان کمک می کند تا برنامه های توسعه مناسبی را طراحی کنند. این پژوهش به لحاظ هدف کاربردی و به لحاظ ماهیت و روش تحقیق توصیفی- تحلیلی و از نظر الگوی سناریونویسی اکتشافی است. داده ها به روش اسنادی و میدانی گردآوری شدند. در روش میدانی پرسشنامه محقق ساخته در قالب ماتریس متقابل برای امتیازدهی عامل ها در اختیار کارشناس ها قرار گرفت. به روش دلفی 30 نفر کارشناس انتخاب شدند. توزیع پرسشنامه ها نیز به روش غیراحتمالی از نوع در دسترس بود. برای تحلیل داده ها از نرم افزار میک مک و مورفول استفاده شد. نتایج پژوهش حاکی از آن است که سیستم منطقه شهری تهران در حالت ناپایدار قرار دارد. ده نیروی پیشران از جمله عامل های ایدئولوژی حاکم، مدیریت یکپارچه، گسترش زیرساخت فناوری اطلاعات و ارتباطات، تجارت الکترونیک، گسترش رقابت پذیری اقتصادی، برندسازی اقتصادی، سیستم مدیریت الکترونیک، شفافیت سیاسی، تسهیل ورود شرکت های چندملیتی، گسترش دیپلماسی شهری به عنوان پیشران های تأثیرگذار در توسعه منطقه شهری تهران استخراج شدند. در نهایت سناریوهای پیش روی توسعه منطقه شهری تهران نشان داد که هشت سناریو وجود دارد که سناریوی اول با بالاترین احتمال وقوع دارای 9 گمانه بدبینانه و یک گمانه بینابین است.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>تاج الدین کرمی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>بررسی همبستگی شاخص NAO با رخداد ARs ایران</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4140&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:black&quot;&gt;رودخانه های جوی یکی از پدیده های اتمسفری مولد بارش های سنگین است می تواند منجر به خسارات جانی و مالی قابل توجهی شود. آگاهی از سازوکار سینوپتیکی شار بخارآب و تشکیل رودخانه جوی در اتمسفر کشور و نیز آشکارسازی در همکنش بین مؤلفه پیوند از دوری &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:black&quot;&gt;NAO&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:black&quot;&gt; و ایجاد و تشدید این پدیده جوی، می تواند تا حد زیادی رخدادهای بارش های سیل آسا را قابل پیش بینی تر سازد&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:black&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; هدف اساسی این تحقیق آشکارسازی پدیده رودخانه جوی در اتمسفر ایران و ارتباط آن با فازهای پدیده &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NAO&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; است. در این راستا از داده های مؤلفه های مداری و نصف النهاری باد، رطوبت ویژه و آنومالی های پدیده &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NAO&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;، از پایگاه داده های &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NOAA&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; طی دوره آماری 1944-2019، اخذ شد. نتایج نشان داد که در طول دوره ی مطالعه رودخانه های اتمسفری ازنظر طول و عرض جغرافیایی جابجایی داشته و به عرضه ای پایین تر به سمت نیمه ی جنوبی ایران کشیده شده اند. بین شاخص &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NAO&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; و جریانات نصف النهاری در سطوح بالاتر از 600 هکتوپاسکال همبستگی بالایی داشت همچنین سیگمای 2101/0 نشان داد که همبستگی بالایی با&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;NAO&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; در منطقه ی رخداد رودخانه های اتمسفری وارد به جو ایران وجود دارد، مراکز پرفشار در جهت دهی رودخانه های اتمسفری نقش مهمی دارند رودخانه های اتمسفری نمی توانند از مراکز فشار عبور کنند و معمولاً در مرز بیرونی این مراکز در نیمکره ی شمالی انحنای نصف النهاری پیدا می کنند و سبب جهت دهی جنوب غربی و شمال شرقی آن ها می شوند. منبع رطوبتی اصلی رودخانه های اتمسفری وارد &lt;span style=&quot;color:black&quot;&gt;به ایران اقیانوس&lt;/span&gt; اطلس می باشد که از سمت پهنه های آبی مانند دریای سرخ، دریای عمان، اقیانوس هند و خلیج فارس تقویت می شود.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;</description>
						<author>مصطفی کرمپور</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>ارزیابی آسایش حرارتی در ساختمان‌های آموزشی مطالعه موردی یک مدرسه؛ شهر سبزوار</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4237&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;با هدف ارزیابی شرایط آسایش حرارتی در فضای کلاس های درس، مطالعه ای میدانی در دبیرستان دخترانه دانش سبزوار انجام گرفت و نظر دانش آموزان در مورد احساس حرارتی از شرایط کلاس در دو ساعت مختلف از روز در طول سال تحصیلی 99-1398 برای کلاس های مختلف ثبت شد. هم زمان مقادیر دما و رطوبت کلاس ها نیز توسط دستگاه دیتالاگر برداشت گردید. برای بررسی تفاوت ها از آزمون های آنالیز واریانس و کروسکال والیس استفاده شد. نتایج نشان دادند موقعیت کلاس ها از نظر جهت جغرافیایی و طبقات تفاوت معنی داری در فراسنج دما و رطوبت ایجاد نکرده است درحالی که تفاوت های ساعتی در ثبت این پارامترها معنی دار بوده است. در کل پاسخ های مرتبط با احساس حرارتی سرمایش درصدهای بالاتری را نسبت به حالت گرمایش داشته است (24% در برابر 12%). احساس حرارتی در ماه های مختلف تفاوت های معنی داری را نشان داده و ماه مهر کمترین درصد فراوانی را در احساس مرتبط با آسایش حرارتی داشته است. در همه ماه ها به جز مهر ترجیح حرارتی موردنظر دانش آموزان &amp;quot;گرمایش&amp;quot; بوده است. اگرچه عملکرد سیستم گرمایش مناسب ارزیابی شده اما زمان بهره برداری از این سیستم باید با فاصله کمتری نسبت به شروع کلاس های صبح انجام گیرد تا از اتلاف بخش قابل توجهی از انرژی جلوگیری شود&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span sitka=&quot;&quot; subheading=&quot;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; با وجودی که دما و رطوبت داخل کلاس ها تفاوت ماهانه معنی داری را نشان ندادند اما از نظر احساس حرارتی دانش آموزان بین ماه های مختلف، تفاوت معنادار آماری وجود داشت. لذا احساس حرارتی چیزی فراتر از ویژگی های فیزیکی دما و رطوبت است و در فضای داخل کلاس ضمن تأثیرپذیری از عملکرد سیستم گرمایش-سرمایش به شدت متأثر از ویژگی های فردی (جنس، سن، وزن، قد، لباس و سطح فعالیت) نیز می باشد.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>علیرضا انتظاری</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>تحلیلی بر کمیت و کیفیت خدمات گردشگری استان زنجان</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4265&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;بدون تردید توسعه گردشگری در هر منطقه ای نیازمند شناسایی دقیق محدوده و ارائه تسهیلات و خدمات موردنیاز گردشگران است که آسیب شناسی ارائه خدمات، از جهت برنامه ریزی در تمامی سطوح برای دستیابی به توسعه موفق گردشگری ضروری است. این تحقیق به آسیب شناسی ارائه خدمات و اولویت بندی مقاصد گردشگری از لحاظ پتانسیل گردشگری در استان زنجان پرداخته است. تحقیق به صورت ترکیبی کیفی و کمی که روش جمع آوری اطلاعات به صورت مصاحبه و پرسشنامه بود. جهت تحلیل مصاحبه از مکس کیودا، برای ارزیابی معیارها از مدل تحلیل سلسله مراتبی و برای توزیع جغرافیایی مقاصد گردشگری نیز از مدل جغرافیایی استفاده شد. براساس یافته های تحقیق استان زنجان علی رغم ظرفیت های مناسب گردشگری، دچار مشکلات فراوانی مانند کمبود امکانات، بی ثباتی در سیاست های ارتقای کیفیت خدمات گردشگری و عدم مدیریت و برنامه ریزی در توسعه گردشگری است و هنوز از پیشرفت مناسبی در این زمینه برخوردار نشده است. پایین بودن سطح عمومی خدمات و ناهماهنگی در برنامه ریزی ها و نگاه های متفاوت به گردشگری دو مشکل اساسی بخش خدمات گردشگری در استان زنجان است؛ اما براساس توزیع جغرافیایی، مقاصد گردشگری: گنبد سلطانیه، دودکش های جن، معدن انگوران، اقامتگاه بوم گردی اولجایتو، اقامتگاه بوم گردی سلطانیه، هتل بوئتیک، عمارت ذوالفقاری، ائل داغی، پل سید محمد، مسجد جامع زنجان، خانه خدیوی، کوه های رنگی در خوشه اول قرار دارند این بدین معنی است که مقاصد گردشگری موردنظر دارای توانمندی های بالایی که جمعیت بیشتری نیز دارند، احاطه شده اند که می بایست به عنوان مناطق اولویت در برنامه ریزی و توسعه خدمات قرار بگیرند.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>حسین طهماسبی مقدم</author>
						<category></category>
					</item>
					
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						<title>کاربرد مدل HEC-RAS در ارزیابی الگوی تغییرات رسوب‌گذاری بخش‌هایی از رودخانه تالار</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4301&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;حوضه آبریز رودخانه تالار در استان مازندران هرساله شاهد سیلاب&amp;rlm;های بزرگ با حجم رسوب انتقالی &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;بسیار&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; زیاد می&amp;rlm;باشد. برای بررسی انتقال رسوب از حوضه&amp;rlm;ی آبریز مذکور، 11 کیلومتر از رودخانه تالار&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;در پنج بازه مکانی در فواصل 4/22- 7/24، 2/18 -5/20، 5/17- 00/18، 75/16- 5/17 و 5/11 &lt;/span&gt;&amp;ndash;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; 75/16 کیلومتر از محدوده شهری از دریا ملاکلا- نجار کلا تا عرب روشن انتخاب شد تا الگوی تغییرات رسوب گذاری و فرسایش در بازه زمانی پنج ساله (1400- 1395) با توجه به قابلیت&amp;rlm;های مدل &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;HEC-RAS&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;، موردبررسی قرار گرفت. برهمین اساس از آمار بلندمدت ایستگاه هیدرومتری کیاکلا، در شرایط سیلاب با دوره&amp;rlm;ی بازگشت&amp;rlm;های 2، 10، 25، 50 و 100 ساله برای حوضه&amp;rlm;ی آبریز ایستگاه مذکور انتقال رسوب و حجم آورد رسوب تجزیه وتحلیل و بررسی شد. نتایج نشان داد مجموع رسوب ورودی در طول کل شبیه&amp;rlm;سازی در ابتدای دوره از مجموع رسوب در انتهای دوره شبیه&amp;rlm;سازی به میزان 9/0 میلیون تن کمتر و رودخانه در اکثر مواقع به صورت فرسایش پذیر است. همچنین متوسط ارتفاع رسوب در بازه مکانی اول (4/22- 7/24) 11 سانتیمتر و میزان رسوب گذاری 6 میلیون تن و رسوب گذاری قابل توجه می باشد. در بازه مکانی دوم (2/18 -5/20) میزان رسوب گذاری تقریباً 1 میلیون تن می باشد. در بازه مکانی سوم نیز نتایج کم وبیش مشابه وجود دارد. در بازه مکانی چهارم شرایط از نظر عمق و حجم فرسایش برای برداشت مناسب نیست. بازه مکانی پنجم (5/11 &lt;/span&gt;&amp;ndash;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; 75/16) میزان فرسایش به طور تقریبی 3/8 میلیون تن به دست آمده است. دامنه تغییر ارتفاع فرسایش در بازه مکانی پنجم از 10 الی 20 سانتیمتر متغیر است.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; style=&quot;font-family:&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot; style=&quot;font-family:&quot;B Nazanin&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>علی شاهنظری</author>
						<category></category>
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					<item>
						<title>پیش‌بینی وقوع توفان گردوغبار با استفاده از روش شبکه‌های عصبی مصنوعی در شهر کرمانشاه</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4007&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;گردوغبار پدیده ای است که آثار زیست محیطی زیادی را در بخش های مختلف زندگی انسان ها از جمله: کشاورزی، اقتصاد، بهداشت و غیره دارد. هدف از پژوهش حاضر بررسی و پیش بینی پدیده گردوغبار در شهر کرمانشاه می باشد. داده های هواشناسی با وضوح 3 ساعته در دوره آماری (2020-2000) ایستگاه کرمانشاه از سازمان هواشناسی کشور اخذ شد. ابتدا داده های گردوغبار نرمال سازی شد و سپس با استفاده از مدل های شبکه عصبی &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;ANN &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;برای پیش بینی غلظت گردوغبار و شبکه عصبی تطبیقی &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;ANFIS&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; برای خطایابی و پیش بینی سری زمانی وقوع گردوغبار در نرم افزار &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;MATLAB&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; خطایابی و پیش بینی شدند. یافته های پژوهش نشان داد که حداکثر میزان غلظت گردوغبار پیش بینی شده مربوط به حداقل نقطه شبنم با بیشترین میزان همبستگی پیرسون با گردوغبار، به میزان 23/3451 میکروگرم بر مترمکعب برآورد شده است&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; همچنین نتایج پیش بینی سری زمانی با استفاده از مدل &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;ANFIS&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt; نشان داد تابع عضویت زنگوله ای خطی با درجه 3، در مراحل آموزش و آزمون، مطلوب ترین تابع ورودی را در بین دیگر توابع عضویت به خود اختصاص داده است. بر اساس مدل های پیش بینی، بیشترین احتمال رخداد حداکثر گردوغبار در 20 سال آینده کرمانشاه با مقدار 94% به دست آمد.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>مجید رضایی بنفشه</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>بررسی سیر تحول گفتمان و توسعه علمی در گذر دولت‌های جمهوری اسلامی ایران</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4308&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span new=&quot;&quot; roman=&quot;&quot; times=&quot;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;پس از پیروزی انقلاب اسلامی، شکل جدیدی از نگرش به علم و فناوری در ایران شکل گرفت. این گفتمان علمی تحت تأثیر مستقیم انقلاب اسلامی و اعتقادات اسلامی بود و ارزش ها و اهداف جدیدی را برای توسعه علم و فناوری تدوین کرد. بعد از انقلاب، ازآنجایی که دولتمردان علم و فناوری را یکی از عوامل کلیدی توسعه و تعالی جامعه می دانستند، سیاست ها و برنامه ریزی های علمی را به منظور تحقق اهداف انقلابی و اسلامی شکل دادند. این نگرش به علم و فناوری در ایران در آن دوره، تأثیر قابل توجهی بر توسعه علمی و فناورانه کشور داشت. باتوجه به این موضوع که جمهوری اسلامی ایران بعد از سال 1357 سکاندار رهبری علمی در منطقه بوده است لازم و ضروری است تا در این پژوهش به بررسی گفتمان علمی انقلاب اسلامی ایران و نقش آن در توسعه قدرت علمی در دولت های بعد از انقلاب پرداخته شود. در راستای دستیابی به این هدف از روش توصیفی-تحلیلی و از آمارهای معتبر در منابع داخلی و خارجی بهره گرفته شد. یافته های تحقیق نشان داد که نوع گفتمان در دولت های مختلف شامل تمرکز بر صنعتی شدن از طریق جایگزینی واردات و منابع سرمایه بر (1360-1368)، نوسازی و نهادگرایی و تمرکز بر فناوری های پیشرفته&lt;i&gt; &lt;/i&gt;(1368-1376)، تمرکز بر فناوری های پیشرفته، نوآوری و توسعه صادرات و عدالت اجتماعی عمدتاً با تکیه بر صنایع دانش بر&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;(1376-1384)، تمرکز بر انتقال صنعت به سمت نوآوری دانش&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;مبتنی بر&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;اقتصاد&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;(1384-1392) و تأکید بر افزایش همکاری های بین المللی با تأکید بر &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;هویت و عقلانیت در تدوین و اجرا (1392-1400) بود. نتایج تحقیق نشان می دهد که در هر دوره می توان به اقداماتی همچون توسعه آموزش عالی و پژوهش های علمی، تأسیس دانشگاه ها و مراکز پژوهشی&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;، &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;ایجاد شبکه های علمی داخلی و بین المللی اشاره کرد. این اقدامات همراه با دلایل سیاسی و ایدئولوژیک، پیشرفت های مهمی در علم و فناوری ایران را به همراه داشت.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;</description>
						<author>ریحانه صالح آبادی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>پهنه‌بندی مناطق مستعد کشت پاییزه چغندرقند در استان گلستان</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4242&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;هدف از پژوهش حاضر نشان دادن مناطق مستعد برای کشت چغندرقند پاییزه در استان گلستان با توجه به پارامترهای دما و بارش است. بدین منظور از آمار درجه حرارت (روزانه) و بارش (سالانه) با طول دوره آماری ۱۵ ساله (۱۳۸۵-۱۳۹۹) استفاده شد. جهت تحلیل داده ها از روش های نمودارهای پتانسیل گرمایی، انحراف از شرایط بهینه، فنولوژی و پهنه بندی استان گلستان ازنظر میزان آبیاری در طول رشد از داده های سالانه بارش استفاده شد. نتایج ارزیابی دما با استفاده از روش پتانسیل گرمایی بر اساس آستانه حرارتی، صفر، ۴ و ۱۰ درجه سانتی گراد در سطح ایستگاه های استان گلستان نشان داد؛ ایستگاه اینچه برون دارای بیشترین واحد حرارتی تجمعی و ایستگاه علی آباد کتول دارای کمترین واحد حرارتی تجمعی هستند. &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;بررسی تاریخ احتمال وقوع یخبندان دیررس بهاری در سطح 95 درصد نشان داد که به دلیل رخداد آن در اواخر فروردین ماه در مرکز، شرق و شمال و شمال شرقی و غرب استان گلستان مصادف با مرحله فنولوژیکی حجیم شدن ریشه و تجمع قند می باشد. &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span b=&quot;&quot; nazanin=&quot;&quot;&gt;همچنین بر اساس انحراف از شرایط بهینه در استان گلستان ایستگاه اینچه برون دارای کمترین انحراف (۶۴/۲۰-) محاسبه گردید. همچنین ازنظر فنولوژی در مرحله جوانه زدن، شش برگی، حجیم شدن ریشه و تجمع قند و رسیدن کامل گیاه چغندرقند پاییزه در استان گلستان مناطق مساعد کشت چغندرقند پاییزه استان گلستان شامل گنبدکاووس، بندر ترکمن، کلاله، اینچه برون و بندر گز مشخص گردیدند. همچنین ارزیابی ها ازنظر بارش با توجه به نقشه ی پهنه بندی سالانه بارش های استان گلستان می توان نتیجه گرفت ازنظر بارشی و تأمین آب موردنیاز چغندرقند پاییزه محدودیت زیادی متوجه استان گلستان نیست البته با توجه به خشک سالی های اخیر چندساله کشت این گیاه در استان احتیاج به آبیاری تکمیلی جهت رشد را دارد.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>حسین محمدی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>تحلیلی بر زمینه‌های کالبدی جرم‌خیزی فضاهای شهری و ارائه راهکارهای طراحی پیشگیرانه، مورد پژوهی: خیابان انقلاب تهران</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4335&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;یکی از مهم ترین رویکردها در جهت افزایش امنیت، پیشگیری از جرم از طریق طراحی محیطی است که بر طراحی شهری تمرکز دارد. &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;هدف از پژوهش حاضر بررسی شرایط محیطی دقیق مؤثر در ایجاد رفتارهای آنومیک و مجرمانه در خیابان انقلاب تهران و ارائه راهکارهای طراحانه جهت کاهش آن ها در این مکان می باشد. در مطالعه پیش رو، برای رسیدن به هدف پژوهش از &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;روشی ترکیبی استفاده شده است. بدین منظور، در بخش اول با استفاده از روش مکان سنجی (شامل برداشت میدانی و همچنین تهیه و تکمیل چک لیست کارشناسان و چک لیست جامع)، شرایط محیطی محدوده موردمطالعه در قالب مجموعه مؤلفه های شرایط جرم خیزی دسته بندی شده و راهکارهایی برای کاهش جرم در خیابان انقلاب تهران ارائه گردید. در بخش دوم این پژوهش و به منظور اولویت دهی به راهکارها و انتخاب راهکار بهینه برای جلوگیری از وقوع جرم و کاهش آن در محدوده موردمطالعه، از روش تحلیل شبکه ای (&lt;/span&gt;ANP&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;) استفاده گردید. بر اساس نتایج پژوهش، آلودگی های محیطی، آلودگی های دیداری، ازدحام و مسئله نور و روشنایی استاندارد در شب، مهم ترین عوامل محیطی رفتارهای آنومیک و مجرمانه در خیابان انقلاب تهران می باشند. همچنین، بهینه ترین راهکارها برای کاهش جرم و افزایش امنیت در محدوده موردمطالعه عبارت اند از: حذف مبلمان ها و عناصر الحاق شده به مسیر پیاده، تعریف خوانای فعالیت ها و کاربری ها در نقاط گنگ فضا، ایجاد نشانه و عناصر شاخص در طول مسیر، محدود کردن تبلیغات و ایجاد روشنایی استاندارد در طول شب برای انجام فعالیت. نتایج پژوهش حاضر نشان می دهد، تغییرات جزئی در محیط می تواند اثرات بزرگی بر کاهش جرم و افزایش امنیت داشته  باشد.&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>فاطمه صفار سبزوار</author>
						<category></category>
					</item>
					
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						<title>تحلیل ادغام جت استریم قطبی و رودباد جنب‌حاره‌ای و تأثیر آن بر بارش‌های غرب ایران (مطالعه موردی 12 الی 15 دسامبر 2010)</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4300&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;گردش جت استریم قطبی و جنب حاره ای به صورت یک الگوی موج مانند در سراسر جهان می باشد. در طول فصل سرد سال با جهش جنوب سوی رودباد جنب حاره ای، الگوی جت استریم قطبی و امکان نفوذ آن به مناطق حاره ای، این دوجت استریم در مواردی با یکدیگر ادغام می شوند. در ماه دسامبر رودباد جنب حاره ای در حوالی عرض جغرافیایی 5/27 درجه شمالی استقرار می یابد که با توجه به استقرار جت استریم قطبی در عرض های میانه، این دو جت استریم در مواردی ادغام می گردند. برای بررسی فراوانی رخداد دو جت استریم و مطالعه اثر ادغام این دو رودباد بر الگوهای جوی تراز پایین تر و میزان بارش بر روی غرب ایران، داده های شبکه بندی شده مؤلفه های باد ماه دسامبر در طول دوره آماری 19-2010 از مرکز &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;NCEPNCAR&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt; با تفکیک مکانی 5/2 درجه دانلود و با کد نویسی در نرم افزار گردز (&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;Grads&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;) نقشه های جت استریم تراز 300 هکتوپاسکال با فاصله زمانی 6 ساعته ترسیم شد. در طول دوره آماری این دو جت استریم طی روزهایی از طریق محور آن ها با یکدیگر ادغام شده اند. بررسی بارش روزانه ایستگاه های غرب کشور با روزهای ادغام دو جت استریم، مشخص شد که این رخداد در تمام موارد منجر به بارش سنگین نشده است. در دوازدهم دسامبر سال 2010 همراه با نصف النهاری شدن جت استریم قطبی و نفوذ آن به مناطق حاره ای، بر روی شمال عربستان، دریای سرخ و شمال شرق آفریقا هسته ی سرعت آن با هسته رودباد جنب حاره ای ادغام گردید. ادغام این دو جت استریم، گسترش عمودی جت به ترازهای پایین تر را به همراه داشته و در تراز میانی جو حرکت نصف النهاری زیاد کم ارتفاع مشاهده می گردد. در نتیجه کم فشار سودانی به سمت عرض های بالاتر جابجا شده و با کم فشار مدیترانه&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;&amp;lrm;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;ای ادغام می گردد که منجر به رخداد بارش سنگین (110 میلی متر) است.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;</description>
						<author>منوچهر فرج زاده اصل</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>تحلیل سری زمانی فرونشست دشت اسفراین با استفاده از روش تداخل‌سنجی راداری</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4350&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;تداوم خشک سالی و هم زمان افزایش میزان وابستگی به منابع آب زیرزمینی در دهه های گذشته دامنه نواحی واقع در معرض فرونشست را به بسیاری از نواحی مختلف کشور گسترش داده که خسارات زیادی را به دنبال دارد. لذا جهت کاهش خسارات ناشی از پدیده فرونشست درک دقیق و کامل فرونشست رخ داده ضروری است. در دهه های اخیر تکنیک تداخل سنجی رادار با روزنه مجازی (&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;SAR&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;) روش متداولی برای اندازه گیری فرونشست گردیده است. در این پژوهش که با هدف تحلیل سری زمانی فرونشست دشت اسفراین با استفاده از روش تداخل سنجی راداری انجام شده &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;از داده های زمینی نظیر چاه های پیزومتریک و میزان افت آب زیرزمینی سطح آب زیرزمینی در دوره های حداقل و حداکثر و چاه های بهره برداری جهت محاسبه میزان تخلیه در سطح آبخوان با استفاده از&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;درون یابی به روش &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;IDW&lt;/span&gt; استفاده گردید. همچنین از داده های راداری شامل تصاویر &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;۱&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; جهت محاسبه نرخ فرونشست در بازه زمانی 8 ماهه اول سال&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;2023&lt;/span&gt; میلادی استفاده گردید. نتایج حاصل از پژوهش نشان می دهد &lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;میزان فرونشست در حوضه مطالعاتی از 1 تا 12 میلی متر در بازه 8 ماهه بوده و 2/75 درصد از مساحت حوضه در پهنه متوسط بحرانی و خیلی بحرانی قرار گرفت که بر این اساس می توان اذعان نمود که دشت اسفراین در حالت بحرانی قرار گرفته است. بیشترین برداشت آب و فرونشست مربوط به چاه های جنوب سنخواست، جنوب خراشا، جنوب ارگ، جنوب گازان، جعفرآباد خرابه و مهدی آباد کال بکو بوده که در پهنه خیلی بحرانی قرار داشته است که جهت کنترل نشست زمین، مدیریت بهینه منابع آب زیرزمینی منطقه ضروری است.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;&lt;br&gt;
&amp;nbsp;</description>
						<author>محمد معتمدی راد</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>الگوسازی تقاضای مصرف گاز طبیعی بر اساس شرایط آب و هوایی در شهر زنجان</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4245&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;امروزه مصرف انرژی نقش تعیین کننده ای در توسعه کمّی و کیفی زندگی بشر دارد. یکی از منابع تأمین انرژی، در راستای توسعه و رفاه اقتصادی و نیز کسب آسایش آب و هوایی گاز طبیعی است. این منبع تأمین انرژی، به ویژه در نواحی سرد کشور و نیز به منظور تأمین آسایش دمایی، نیازمند مدیریت صحیح است. مدیریت صحیح این منبع انرژی فسیلی از طریق آگاهی و پیش بینی از میزان تقاضای آن میسر است. بدین منظور تقاضای مصرف گاز طبیعی در شهر زنجان به عنوان یکی از شهرهای سرد ایران زمین موردبررسی و الگوسازی قرار گرفت. برای انجام پژوهش حاضر از دو گروه داده (عناصر آب و هوایی و میزان مصرف گاز طبیعی) برای یک دوره آماری 9 ساله (1400-1392) در مقیاس روزانه استفاده شده است. به منظور الگوسازی تقاضای مصرف گاز طبیعی در شهر زنجان از نرم افزار &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;CurveExpert&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt; و نیز روش وایازی (رگرسیون) استفاده شد. بر اساس برازنده ترین الگو، عنصر دما به عنوان تنها متغیر مستقل در الگوی انتخابی جای گرفت. الگوی نهایی، وایازی چندجمله ای با ضریب همبستگی 94/0 (ضریب تبیین 03/89 درصد) اختیار شد. درصد افزایش مصرف گاز طبیعی به ازای یک درجه کاهش دما، از دمای 22 تا دمای 16 درجه بیشترین درصد افزایش و از دمای صفر تا 5- درجه کمترین درصد افزایش به ازای یک درجه کاهش دما رخ داده است. نقطه عطف و شروع مشکلات مربوط کمبود گاز طبیعی در شهرستان زنجان دمای کمتر از منفی 7 درجه تشخیص داده شد.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>محمد محمدی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>بررسی تطبیقی زیبایی‌شناسی بصری فضای شهری در محلات گلستان و مرادآب از شهر کرج</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4189&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;زیبایی در زمره متعالی ترین نیازهای بشری است. انسان از زمانی که به ساخت شهرها مبادرت ورزیده، به حس زیبایی شناسی توجه داشته است. هدف این پژوهش ارزیابی مقایسه ای دو محله گلستان و مرادآب به عنوان دو محله مشهور برخوردارترین و نابرخوردارترین محلات از شهر کرج، به لحاظ شاخص های زیبایی شناسی فضای شهری است. روش تحقیق توصیفی_ تحلیلی بوده و &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;گردآوری داده ها در خصوص &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;14 مؤلفه برگزیده مربوط به زیبایی شناسی محیط شهری، &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;با روش مشاهده مستقیم و استفاده از&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt; ابراز سیاهه ارزیابی صورت گرفته است. &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;برای تحلیل و مقایسه سطح زیبایی شناسی دو محله، پارامترهای آمار توصیفی به کار گرفته شده و برای تحلیل نابرابری های فضایی به ترسیم نقشه های پهنه بندی در سیستم اطلاعات جغرافیایی و محاسبات و تحلیل بر روی جداول توصیفی مربوط&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;،&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; مبادرت گردیده است. با توجه به ارزیابی شاخص ها در دامنه امتیازات 10-1 و قائل  شدن امتیاز بالاتر به سطح بالاتر از زیبایی شناسی، یافته ها نشان دادند که رقم  میانگین کل شاخص ها در محله گلستان 6/31 و در محله مرادآب 2/57 است. همچنین در محله گلستان رقم میانه 6/43 و رقم چارک اول 4 است درحالی که در محله مرادآب این ارقام به  ترتیب 1/78 و 1 هستند. تحلیل فضایی نقشه پهنه بندی نشان داد که در محله گلستان در مجموع شاخص ها، پهنه هایی که به لحاظ زیبایی شناسی در سطوح &amp;laquo;بسیار پایین&amp;raquo; و &amp;laquo;پایین&amp;raquo; قرار داشته باشند وجود ندارد حال آنکه در محله مرداب، هیچ پهنه ای در سطوح &amp;laquo;بالا&amp;raquo; و &amp;laquo;متوسط بالا&amp;raquo; قرار ندارد، می توان نتیجه گرفت که محله گلستان در سطح بالایی از نظر شاخص های زیباشناسی قرار داشته و نابرابری فضایی زیادی در درون و میان دو محله مطالعه شده، وجود دارد.&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;FA&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:&quot;B Nazanin&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&amp;nbsp;&lt;/div&gt;</description>
						<author>حبیب اله فصیحی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>استراتژی آمریکا برای مهار قدرت چین در دریای چین جنوبی</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4324&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;br&gt;
&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;با&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;افزایش&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;مداوم&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;قدرت&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;اقتصادی،&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;فناوری&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;و&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;نظامی چین،&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;نگرانی&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;آمریکا&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;از&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;خیزش روزافزون پکن&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;رو&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;به&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;فزونی&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;است. ایالات متحده خیزش منطقه ای چین را به عنوان چالشی برای جاه طلبی هژمونیک خود تلقی می کند&lt;/span&gt;.&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; افزایش قدرت نظامی و نفوذ سیاسی چین در شرق آسیا باعث ایجاد نگرانی و سوءظن میان برخی از همسایگان آن و واشنگتن شده است. در این میان، آمریکا&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;بنا&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;بر دلایلی&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;همچون؛&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;مقابله&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;با&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;خیزش&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;چین&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;و&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;حمایت&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;از&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;آزادی دریانوردی&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;در&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;این&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;منطقه&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;حضور&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;فعال&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;دارد&lt;/span&gt;.&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; تلاش واشنگتن برای به چالش کشیدن حاکمیت دریایی چین، منعکس کننده نگرانی ایالات متحده از ظهور چین و عزم این کشور برای حفظ هژمونی خود در آسیا و اقیانوسیه است&lt;/span&gt;.&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; این امر باعث می شود تا ایالات متحده در تلاش برای ایجاد یک حلقه محاصره علیه چین و مهار منطقه ای آن و در نهایت جلوگیری از تغییر موازنه قدرت به ضرر واشنگتن در شرق آسیا برآید. بدین ترتیب، &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;سؤال پژوهش این است که&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; آمریکا برای مهار قدرت چین در دریای چین جنوبی چه راهبردی را دنبال می کند؟ فرضیه قابل طرح این است که با توجه به این که رشد اقتصادی چین و گسترش قدرت دریایی این کشور، تهدیدی راهبردی برای کشورهای منطقه و ایالات متحده محسوب می شود؛ لذا واشنگتن برای جلوگیری از تبدیل شدن چین به یک هژمون منطقه ای در شرق آسیا؛ در تلاش برای جلوگیری از صعود و خیزش منطقه ای پکن برآمده است. جلوگیری از قدرت یابی چین و مهار و انزوای این کشور در منطقه، ضمن شکل گیری موازنه قدرت به نفع واشنگتن و هم پیمانان منطقه ای آن در شرق آسیا، می تواند کمک شایانی به توسعه نفوذ و تأمین اهداف و منافع ایالات متحده و متحدان آن در منطقه نماید. &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;برای تحلیل&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;داده ها&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;از&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;روش&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;توصیفی-تحلیلی&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;استفاده&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;شده&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;است&lt;/span&gt;.&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>حمید درج</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>سنجش پایداری مؤلفه‌های برآمده از استراتژی توسعه شهری (CDS)  از منظر ساکنین (نمونه موردی: شهر اردبیل)</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4261&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;استراتژی توسعه شهری رویکردی نوین در برنامه ریزی و مدیریت شهری است که با کاهش فقر، مشارکت شهروندی و افزایش سرمایه گذاری می تواند زمینه را برای رسیدن به توسعه پایدار شهری فراهم سازد. شهر اردبیل مانند بسیاری از شهرهای ایران با مشکلات عدیده ای از قبیل، حکمروایی نامناسب، بافت های فرسوده، مسکن نامناسب، ضعف زیرساخت ها و کمبود خدمات اجتماعی - بهداشتی مواجه است که مجموع این عوامل ضرورت توجه به برنامه ریزی استراتژیک را نشان می دهد. هدف این مقاله سنجش شاخص های استراتژی توسعه شهری در شهر اردبیل می باشد. روش تحقیق توصیفی- تحلیلی و مبتنی بر بررسی های میدانی است. حجم نمونه با استفاده از نرم افزار Sample Power 230 نفر برآورد گردید. جهت ارزیابی نهایی و تحلیل داده ها از آزمون های آماری T تک نمونه ای و نیز از روش مدل سازی معادلات ساختاری (SEM) در نرم افزار AMOS Graphics استفاده گردید. نتایج حاصل از آزمون T تک نمونه ای پژوهش نشان داد وضعیت شاخص های استراتژی توسعه شهری شامل زیست پذیری، حکمروایی مطلوب، بانکی بودن و رقابت پذیری در قلمرو موردمطالعه با میانگین های 2/21، 2/6، 2/62، 2/15، در وضعیت قابل قبولی قرار ندارند. نتایج تحلیل عاملی مرتبه دوم پژوهش نشان داد از میان ابعاد استراتژی توسعه شهری، بُعد رقابتی بودن با بار عاملی 0/93 داری بیشترین اثرگذاری و بُعد بانکی بودن با وزن عاملی 0/62 دارای کمترین اثرگذاری در شهر اردبیل می باشند. همچنین یافته های پژوهش نشان داد که با افزایش شاخص حکمروایی خوب شهری بُعد بانکی بودن به میزان 0/55، بُعد زیست پذیری به میزان 0/76 و بُعد رقابتی بودن به میزان 0/86 افزایش می یابد.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>محمد حسن یزدانی</author>
						<category></category>
					</item>
					
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						<title>تبیین نقش زنان در حکمروایی خوب شهری سمنان در دوران کرونا و پساکرونا</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4205&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;در چند دهه اخیر حکمروایی خوب شهری به عنوان اثربخش ترین، کم هزینه ترین و پایدارترین شیوه اعمال مدیریت نظام پیچیده و چند سطحی امروزه شهرها مطرح شده است که محوریت این رویکرد در مدیریت شهری، بر مبنای توسعه ای مردم سالار و برابرخواهانه، برای تأثیرگذاری تمامی نیروهای ذی نفع و ذی نفوذ در اداره امور شهرها و همچنین پاسخگویی به تمامی نیازهای این گروه هاست. از طرفی دیگر زنان به عنوان یکی از اصلی ترین و تأثیرگذارترین گروه ها و نیروهای اجتماعی در حیات مدنی شهرها، امروزه دارای نقشی پررنگ در مقوله های مرتبط با اداره شهرها هستند. ازاین رو هدف از پژوهش حاضر &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;نقش حکمروایی خوب شهری در دوران کرونا و پساکرونا با توجه به جایگاه زنان &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;در شهر سمنان می باشد. از منظر هدف، پژوهش حاضر کاربردی بوده و با توجه به شیوه گردآوری داده ها توصیفی - پیمایشی است. برای جمع آوری داده ها و اطلاعات این تحقیق از ابزار پرسشنامه استفاده شده است. جامعه آماری پژوهش حاضر شهروندان شهر سمنان با جمعیت 185129 نفر بوده که حجم نمونه با استفاده از فرمول کوکران معادل 383 نفر محاسبه شده است. جهت تجزیه وتحلیل داده ها، از آزمون های &lt;/span&gt;t&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt; تک نمونه ای و رگرسیون خطی چند متغیره استفاده شده و در نهایت &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;برای تعمیم نتایج از نمونه به جامعه آماری از روش مدل سازی معادله ساختاری به وسیله نرم افزار لیزرل استفاده گردید. نتایج حاصل از آزمون تی تک نمونه ای نشان داده است که مقادیر &lt;/span&gt;t&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; برای هر یک از متغیرهای پژوهش با میانگین های پایین تر از میانه نظری، به صورت عددی منفی حاصل شده است که مشخص شده است وضعیت ابعاد حکمروایی خوب شهری در شهر سمنان و جایگاه زنان در آن در وضع مناسبی قرار ندارد. همچنین نتایج حاصل از معادلات ساختار در نرم افزار لیزرل نشان داده است که متغیر عدالت بیشترین و قوی ترین ارتباط را با حکمروایی خوب شهری دارد. در نهایت نیز نتیجه بررسی ها نشان می دهد؛ نمی توان به تحقق حکمروایی خوب شهری، بدون تعریف و تبیین کاربردی جایگاه ویژه زنان به عنوان نیمی از شهروندان شهر و از اصلی ترین گروه های ذی نفع و ذی نفوذ در اداره امور شهرها، امیدوار بو&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt;د.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>زینب کرکه آبادی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>تحلیلی بر بازآفرینی شهری در بافت تاریخی (مطالعه موردی: شهر دزفول)</title>
						<link>http://system.khu.ac.ir/jgs/browse.php?a_id=4256&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;direction:rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;unicode-bidi:embed&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;ناحیه&lt;b&gt; &lt;/b&gt;تاریخی&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;شهرها&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;میراث&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;ارزشمند&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;معماری&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;و&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;کالبدی&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;و تجلی گاه&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;ابعاد&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;فرهنگی،&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;اقتصادی&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;و&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;اجتماعی مردمانی&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;است&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;که&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;در&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;دوره های&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;تاریخی&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;در&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;این&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;بخش&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;از&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;شهر،&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;روزگار&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;سپری&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;کرده&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;و&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;هویت&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;فرهنگی&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;آن&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;را&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;به&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;ثبت&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;رسانده اند&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; این نواحی شاهد زوال در توسعه شهری بوده و اقدامات اندک پیرامون بهسازی یا بازسازی آن ها قابل قبول نبوده است. &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;هدف این پژوهش تحلیلی بر بازآفرینی شهری در بافت تاریخی (قدیم) شهر دزفول است&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;. روش&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;تحقیق در پژوهش حاضر&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;به صورت&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;پیمایشی است. جامعه آماری مطالعه حاضر کلیه ساکنان بافت تاریخی شهر دزفول می باشند که بر طبق آخرین سرشماری مرکز آمار ایران، دارای جمعیتی معادل 29277 نفر می باشد. برای دستیابی به حجم منطقی از نمونه از فرمول کوکران استفاده شده است که تعداد 384 نمونه به صورت تصادفی طبقه ای انتخاب شده&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; اند.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt;ابزار اصلی جمع آوری داده ها در تحقیق حاضر؛ پرسشنامه می باشد. اما با توجه به تخصصی بودن پرسشنامه از روش های مصاحبه و مشاهده نیز برای تکمیل اطلاعات پرسشنامه ها استفاده شده است. نتایج&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; حاصل از مدل های &lt;/span&gt;SWOT&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;FA&quot;&gt; و &lt;/span&gt;QSPM&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot;&gt; نشان می دهد که از مجموع پنج راهبرد نهایی بازآفرینی بافت تاریخی دزفول دو راهبرد اول متعلق به راهبردهای تهاجمی است. بدین ترتیب مطالعه و طراحی امکان ایجاد پیاده راه ها در بافت تاریخی با توجه به تمایل روزافزون مردم به گردشگری فرهنگی و تاریخی و استفاده از فضای حاشیه رودخانه دز برای توسعه فضای سبز و طراحی کریدور سبز در امتداد رودخانه و بافت تاریخی را می توان به عنوان مهم ترین راهبردهای تهاجمی مطرح کرد.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>حمیدرضا جودکی</author>
						<category></category>
					</item>
					
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